अगर कारोबार इतना ही आसान, तो नौकरियों की कमी क्यों ?

भारत देश कारोबार का अगर निजि उद्योगों व व्यापारियों से जाना जाए तो बहुत कुछ कहता है अगर वल्र्ड बैंक की एक शाखा ‘वल्र्ड ईज ऑफ बिजनेस’ की रिपोर्ट की माने तो भारत में कारोबार करना आसान हो गया है वल्र्ड बैंक की रैंकिग की बात करे तो भारत 130 से 100 पर आ गयी है उनका कहना ये भी की लोन लेना आसान हो गया है पिछले वर्ष की रेकिंग बात करे तो 44 थी ओर अब 29 पर आ गयी है जो वल्र्ड बैंक की तरफ से एक अच्छी खबर मानी जा रही है। मगर देश की परिस्थियां कुछ ओर ही बयां करती है।

क्या कहता है आर.बी.आई
आर.बी.आई के आकंडो के हिसाब से अगर बात करे तो नए निवेश का स्तर पिछले 12 साल से सबसे निचले स्तर पर है वल्र्ड बैंक रिपोर्ट की बात करें तो अगर कारोबार करना इतना आसान हो गया है तो निवेश स्तर इतना नीचे कैसे जा सकता है इसलिए कारोबार की स्थिति कुछ ओर ही बताती है कि भारत में आज कारोबार की हालात जो है उसे जमीनी स्तर पर जा कर पता लगाया जा सकता है कुछ आंकडों पर नजर ओर डाले तो छोटे और मध्यम उद्योगों का दिवालियापन की बात करें तो 2012-13 में 2.2 लाख था अब बडक़र 2015-16 में 4.9 लाख हो गई।

रोजगार क्या कहता है
वल्र्ड बैंक की इस साल की रिपोर्ट में नौकरियां बनाने के लिए रिफर्ॉमिंग का नाम दिया है मगर देश में कुछ उल्टा ही है जब से सुधार हो रहा है जब से उदारीकरण हो रहा है जैसे-जैसे वल्र्ड बैंक हमें धीरे-धीरे ऊपर की ओर कर रहा है वैसे-वैसे हमारे देश में उसका असर कुछ उल्टा ही दिखाई दे रहा है रोजगार का जो स्तर प्रतिवर्ष के आंकडे के हिसाब से देखे तो गिरता ही जा रहा है 2005-10 की बात करें तो रोजगार दर 0.7′, 2010-12 में 0.4′ या अगर पिछले तीन की बात करें तो 2014-16 में नकारात्मक आंकडे सामने आते है जो -0.4′ है अगर कारोबार करना इतना आसान हो गया है तो नई नौकरियों का कुछ पता नहीं।

सी.एम.आई.ई क्या कहता है
सी.एम.आई.ई की महेश व्यास द्वारा प्रकाशित रिपोट के मुताबित पिछले चार महीने जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान लगभग 15 लाख लोगों की नौकरियां चली गई है पिछले चार महीने में यह आंकडा बडक़र लगभग 20 लाख हो गया है हमारे देश में नौकरियां दिन-प्रतिदिन जा रही है अगर कारोबार इतना ही आसान है तो नौकरियों की कमी क्यों होती जा रही है।

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